Basic InfoGeneral Information information

लाल किला का असली नाम क्या है, लाल किला किसने बनवाया? लाल किला की पूरी जानकारी

Lal Qila Ke Bare Me Puri Jankari : नमस्कार दोस्तों, हमारे देश में एतिहासिक कई ऐसी इमारते हैं जो आज ही आसमान को छुटे हुए खड़ी हैं। ऐसी ही कुछ इमारतों के बारे में आपको इस लेख के माध्यम से बताने जा रहे है। 

हमारे देश के हर कौने में कई तरह की इमारतों में सबसे ज्यादा इमारते वो हैं जिनको बनाने में मजदूरों ने कई साल लगा दिए थे। उन इमारतों की सूची में से एक ऐसी ईमारत के बारे में हम आपके लिए जानकारी लेकर आये हैं। इस ईमारत को हम लाल किला के नाम से जानते हैं।

यह Lal Qila आज भी अपने इतिहास के लिए प्रशिद्ध हैं। इस लेख में आपको इसी के बारे में पूरी जानकरी दी जाएगी। इस लेख को अंत तक पढने के बाद आपको इसके बारे में पूरी जानकारी मिल जायेगी। 

लाल किला की सामान्य जानकारी

लाल किला का असली नाम क्या है, लाल किला किसने बनवाया? लाल किला की पूरी जानकारी

देश की राजधानी में बनी यह ईमारत अपने इतिहास और एतिहासिक कारणों से प्रशिद्ध हैं। ईमारत भले कोई भी तो चाहे तो कुतुबमीनार हो या जमा मज्जिद यह सब अपने इतिहास के लिए आज प्रशिद्ध हैं। दिल्ली में आने वाले पर्यटकों को आकर्षण करने में भी लाल किला कोई कसर नहीं छोड़ता हैं। 

लाल किला आज हमे लाल कलर में दीखता हैं पर आपको शायद यह बात जानकारी हैरानी होगी की यह किला कभी सफ़ेद कलर में हुआ करता था। इस किले का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजाह ने करवाया था। पूरातत्वो की माने तो किसी समय में यह किला सफ़ेद चुने से बना था परन्तु बाद में अंग्रेजों ने इसे लाल रंग से रंगवा दिया और उसके बाद से ही यह किला Lal Qila के नाम से जाना जाने लगा। 

Lal Qila का असली नाम 

हम जिस ईमारत को लाल किला के नाम से जानते हैं क्या आपको उस ईमारत का असली नाम पता हैं ? अगर नही तो आपको हम इस लेख के जरीये बता देते हैं की इस ईमारत का असली नाम किला-ए-मुबारक हैं। इतिहास के पन्नो में इस बात का भी जिक्र हैं की इस किले का को पहले किला-ए-मुबारक के नाम से जाना जाता था। 

मुग़ल शाहजहा ने इस ईमारत का निर्माण उस समय करवाया था जब उसने भारत की राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानांतरित किया था। इसके कुछ समय बाद इसका नाम और इसका कलर दोनों बदल दिया गया था। इतिहास में यह ईमारत काफी प्रशिद्ध है। 

10 साल में बन के हुई तैयार

जिस समय इस ईमारत यानी Lal Qila का निर्माण किया गया था उस समय इतने संसाधन मोजूद नही थे। यही वो कारण हैं जिसकी वजह से इस ईमारत को बनने में पुरे 10 साल लग गये। इस ईमारत को बनाने में 10 साल का समय लगना अपने आप में काफी बड़ी बात थी क्योंकि उस समय में बनी यह ईमारत आज भी दिल्ली में स्तिथ हैं और वैसी ही हैं जैसे उस समय थी। 

Lal Qila का निर्माण

इतिहास की हम जिस ईमारत की बात कर रहे हैं उस के निर्माण की भी अपनी कहानी हैं। एक दशक में बनी इस ईमारत के वास्तुकार उस्ताद हामिद और उस्ताद अहमद थे। इस ईमारत के निर्माण की शुरुआत 1638 में शुरू हुई थी और यह ईमारत 1648 में बन कर तैयार हो गई थी। इस ईमारत को बनने में इतना समय इसलिए लगा था क्योंकि उस समय वर्तमान समय जितनी अत्याधुनिक मशीने नही थी। परन्तु इस ईमारत की बनाने जो कलाकारी की गई वो हम सब के सामने हैं। 

Lal Qila में देखने योग्य स्थल

अगर आप लाल किले पर घुमने जाए तो आप इन स्थानों पर जरुर जाए। यह वो स्थान जहा पर आप जा सकते हैं। यह हैं वो कुछ स्थान – 

छाबरी बाज़ार – जैसे ही आप इस Lal Qila पर घूमने जाए तो वहा जाते ही आपको सबसे पहले यह बाज़ार दीखता हैं। इस बाज़ार में कई सारे सामान की दुकाने लगती हैं और आप भी यहाँ से शौपिंग कर सकते हैं। 

लाहौरी दरवाजा – जैसे ही आप इस बाज़ार से आगे निकलते है और इस किले की और बढ़ते हैं तो आपको यहा पर इस किले में जाने का एक दरवाजा मिलता हैं। यही इस किले का मुख्य दरवाजा लाहौरी दरवाजा के नाम से जाना जाता हैं। 

दिल्ली दरवाजा – जैसे ही हम इस किले के दक्षिण की और जाते हैं तो हमें वहा पर एक और दरवाजा दीखता हैं जिसकी बनावट भी लाहौरी दरवाजे जैसी हैं। यह दरवाजा लाहौरी दरवाजा कहलाता हैं। 

पानी दरवाजा – यह दरवाजा दक्षिण की और जब आप जाते हैं तो वहा से पूर्व की और स्तिथ हैं। यह एक छोटा दरवाजा हैं जो पूर्व में स्तिथ हैं और नदी की और स्तिथ हैं। 

चट्टा चौक – जैसे ही आप लाहौर गेट से अंदर जाते हैं तो इसके अंदर जाते ही आपको एक चट्टा चौक देखने को मिलता हैं। यहा पर मुगलों के समय हार्ट लगा करता था जहा पर सिल्क और ज्वेलरी इतियादी बेचे जाते थे। 

नौबत खाना – इसको नक्कर खाना के नाम से भी जाना जाता हैं। यहा पर मुग़ल काल में विशेष रूप से रात्रि समय में संगीत और इससे सम्बंधित्क कार्यक्रम हुआ करते थे। 

दीवान – ए – आम – इस जगह को किले का मुख्य भाग माना जाता हैं। यह राजा का मुख्य कोर्ट हुआ करता था जहा पर जनता की तकलीफे और दुख दर्द सुने जाते थे। इसी के सामने जनता का हौल था। 

मुमताज महल – इस महल को राजा की दासियों और रानियों के लिए रखा जाता था। यहा पर एक संग्रालय भी था।

रंग महल – यह भी एक महल था जिसे रानियों के लिए बनाया गया था। यहाँ पर एक पूल था जिसे नहर – ए – बहिश्त से भरा जाता था। ।

दीवाने ख़ास – जहा पर दीवाने – ए – आम बनाया गया था उसके सामने ही दीवान – ए – ख़ास बनाया गया था। 

मोती मस्जिद – Lal Qile में एक मस्जिद भी बनी हुई है। इसका निर्माण 1659 में ओरंगजेब दुवारा बनवाया गया था।

आज के समय में Lal Qila का महत्त्व

वर्तमान में यह किला का महत्त्व काफी ज्यादा हैं। यहाँ पर हर साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के प्रधानमंत्री दुवारा झंडा फहराया जाता हैं। अगर आम जनता यहाँ आना चाहती हैं तो उनके लिए यह सप्ताह में 6 दिन खुला रहता हैं वही यह सोमवार को बंद रहता हैं। 

भारतीय अगर आप घुमने आते हैं तो आपको 10 रूपये चार्ज देने होते हैं वही अगर कोई विदेशी यहाँ आता हैं तो उसके लिए 150 रूपये का चार्ज देना होता हैं। वही यहा की मस्जिद को आम जनता के लिए बंद रखा जाता हैं। 

निष्कर्ष

इस लेख के माध्यम से आपको Lal Qila Ke Bare Me Puri Jankari के बारे में बताया गया हैं। उम्मीद करते हैं आपको यह लेख अच्छा लगा होगा और यह जानकारी पसंद आई होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button